यह ब्लॉग मेरे द्वारा लिखी गयी कविताओं का संग्रह है जिसमे विशेष रूप से गढ़वाली तथा हिंदी कविताये शामिल हैं | मुझे कवितायेँ लिखना अतिप्रिय है |
जिंदगी
करो ऐसा काम कि बन जाए एक पहचान चलो हर कदम ऐसा कि बन जाए निशान जिंदगी तो हर कोई काट लेता है यहां जियो जिंदगी ऐसे कि एक मिसाल बन जाए इस खूबसू...
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प्रिय उत्तराखंडी मित्रो, सादर प्रणाम, मैं यख उत्तराखंड का चार धाम यात्रा का बारा मा एक निबंध लिख्णु छोऊ आप सभी जाणदा छन की हमारा उत्तराखं...
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जब मैंने खुद अपना पहाड़ छोड़ दिया क्यों कहूँ की पहाड़ क्यों छोड़ गए लोग जब मैं ही ना रहा अपनी जन्मभूमि में तो क्यों लगाऊं इल्जाम की पहाड़ को...
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वास्तव में उत्तराखंड की वीडियो व सी डी फ़िल्म निर्माण की दुनिया अपने आपको फ़िल्म इंडस्ट्री कहलाने लायक मंच की वो पहली सीढियाँ भी नहीं चढ़ प...
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जिंदगी कुछ यंन छा गुजन लगीं बीस हजार मां अपडु पहाड़ छोड़ी पड़यां यख दिल्ली बाजार मां रैंणु- खाणु जुलम कन ह्वे गे इं महंगाई मां गुजार...
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मन च आज मेरु बोलंण लग्युं जा घर बौडी जा तौं रौत्याली डंडी कांठियों मा अपणा प्राणों से भी प्रिय छ हम्कैं ई धारा मेरु मुलुक जग्वाल करणु ...
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यंग उत्तराखंड द्वारा आयोजित तीसरा कैरियर गाइडेंस कैम्प मानिला, अल्मोडा (उत्तराखंड) यंग उत्तराखंड द्वारा दिनांक 12 जनवरी 2009 को राजकीय...
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दोस्तों, यंग उत्तराखंड द्वारा आयोजित दो दिवसीय निशुल्क: स्वास्थ्य परीक्षण शिविर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जनपद के प्रतापनगर ब्लाक में दिन...
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बरसू का त्याग, प्रयास व् बलिदान का बाद हमुन 9 नवम्बर 2000 मा अपणु पृथक उत्तरांचल राज्य पाई | 1 जनवरी 2007 माँ स्थानीय लोगों की भावनाओं थैं ध...
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करो ऐसा काम कि बन जाए एक पहचान चलो हर कदम ऐसा कि बन जाए निशान जिंदगी तो हर कोई काट लेता है यहां जियो जिंदगी ऐसे कि एक मिसाल बन जाए इस खूबसू...
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जन्मभूमि हमें हमारी है रही पुकार , कर रही चीत्कार सूने पड़े है चहूँ खेत-खलिहान खाली है गौं-गुठियार हैं निर्जन वो गलियाँ जंहा पथिको की थी क...