मेरा परिचय

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Delhi, India
प्रिय उत्तरांचली मित्रो, आप सभी को मेरा आदर युक्त सादर सेवा भाविक नमस्कार,| मेरा नाम विजय सिंह बुटोला है | मैं मूल रूप से टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड का निवासी हूँ | वर्तमान समय में मैं परिवार सहित दिल्ली में रहता हूँ | आज इन्टरनेट के मध्यम से हम सभी उत्तराखंडी एक दुसरे के साथ जुड़े हुए है तथा किसी न किसी रूप में उत्तराखंड की विभिन्न समाज सेवी संस्थाओ के द्वारा हम सभी वहा के जन-समुदाय के लिए अपने अपने सामर्थ अनुसार जुड़े हुए है | जिन्होंने अपने सतत प्रयासों द्वारा दुनिया भर में बसे उत्तराखंडियों को इंटरनेट के मध्यम से जोड़ा हुआ है , जहाँ हम सभी सफलतापूर्वक अपनी क्षमता और संसाधनों का विभिन्न रूपों में उत्तराखंड राज्य तथा उसके निवासियों के विकास के लिए उपयोग करते हैं |यह वास्तव में एक उत्कृष्ठ व सराहनीय प्रयास है| एक उत्तराखंडी होने के नाते मैं आप सभी से आशावान हूँ कि आपके दृढ-निश्चय और लगनशीलता से किए गए प्रयासों से ही हमारा उत्तराखंड निश्चय ही एक सम्रध व विकसित राज्य बन सकेगा |

Monday, December 19, 2016

ऐ इंसान जरा तू ठहर



ऐ इंसान जरा तू ठहर
जीवन कि इस दैनिक भागदौड़ में
इंसान का अपना वजूद खो गया है आशाओ के भंवर में
सब कुछ पा लेने कि चाहत में मशगुल है इस तरह
न चाहते हुए भी भूल गया है ख़ुद को खोजता है दुसरो के अक्स में

दिन भर व्यस्त रहकर मग्न है अपने काम में
फुरसत नही है दो जून लेने कि सुबह हो या शाम में
सपनों का संसार बुना है उसने अपने मन के ताने-बने में
जाने कब होंगे पूरे सपने उसके बात होती है हर अफसाने में

बेसुध इंसान पा लेना चाहता है हर उस मुकाम को
बाकि सब कुछ याद है भूल गया है बस आराम को
इस भागदौड़ में हर कोई इस कदर आगे पहुचना चाहता है
पाने को अपनी मंजिल कोई खून तो कोई पसीना बहाता है

न जाने कब मिटेगी इंसान कि ये तृष्णा और पिपासा
सच आता है जब सम्मुख रह जाता है फिर भी प्यासा

क्या लाया था इस जग में न दौड़ इस कदर
कर कर्म होगा सब मनचाहा ऐ इंसान जरा तू ठहर ....जरा तू ठहर

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